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मुर्गी पालन(murgi palan) , poultry farming मुर्गी पालन से बनो अमीर लाखों का है मुनाफा Poultry Farming: कम लागत में होगा ज्यादा मुनाफा

 परिचय :- 

मुर्गियों को माँस व अंडो के लिये पाला जाता है भारत मे मुर्गी  पालन व्यवसास पांच हजार वर्षो पुराना है। वृतमान में देश मे इस वयवसास का विस्तार हो गया है murgi palan व्यवसास के लिए कई संस्थाओ की स्थापना की गई है। वर्ष 2014-15 मे भारत मे अण्डा उत्पादन 78.5 अरब था। वर्ष 2013 मे कुकुट माँस का उत्पादन 3.5 मिलियन टन हुआ। 

मुर्गी पालन

भारत मे मुर्गी पालन मे आंध्र प्रदेश का प्रथम स्थान है यह व्यवसास कम पूँजी मे प्रारम्भ किया जा सकता है तथा इसमें कम स्थान व श्रम की आवश्कता पड़ती है। मुर्गी पालन मे उत्पादन शीघ्र शुरू हो जाता है। 


मुर्गी पालन ( poultry farming) 

मुर्गीयों का वर्गीकरण एवं प्रमुख नस्ले :-

मुर्गीयों की जातीयों को निम्न दो भागो में वर्गीकृत किया गया है -

(1) उत्प्ति स्थान के अनुसार मुर्गीयों का वर्गीकृत -

(i) देशी या भारतीय नस्ले (ii) एशियाई वर्ग (iii) इंग्लिस वर्ग (iv) अमेरिका वर्ग (v) भूमध्यसागर वर्ग (vi) पोलिश वर्ग। 

(2) उपयोगिता के आधार पर मुर्गीयों का वर्गीकरण - अण्डा देने वाली जाती, माँस देने वाली जातियाँ,  द्विउद्शय जातियाँ। 

प्रमुख नस्ले:-  

रोड आईलेंड रेड,  व्हाइट लेगहॉर्न,   रेड कोर्निस, प्लैमाउथ रॉक,। 


नस्लो का चुनाव 

* अण्डा उत्पादन के लिए -  रोड आईलेंड रेड  इस नस्ल की मुर्गीयों का अण्डा उत्पादन अच्छा होता है और माँस भी। व्हाइट लेगहॉर्न, एनकोना, मिनोरका

* माँस उत्पादन के लिए -  रेड कोर्निस और प्लैमाउथ रॉक इस मुर्गी से उतम कोटि का माँस प्राप्त होता है। 

* लडाकू मुर्गा - कड़कनाथ 

मुर्गीयों का आवास प्रब्धन -

मुर्गीयों के लिए अच्छे आरामदायक आवास की व्यवसास करनी चाहिए। आवास के लिए स्थान का चयन सावधानी से करना चाहिए इसमे सुरशा, प्रकाश, हवा, छत, जल की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। आवास हमेसा सवच्छ रहना चाहिए। 

कुकुट आवास को चार प्रणालियों मे बाँट है। 
  1. घर के पीछे मुर्गी 
  2. मुर्गीयों पालनको खुले मे रखना 
  3. अर्ध्द सघन प्रणाली - पोल्ट्री घेरा प्रणाली, और उठाऊ मकान प्रणाली। 
  4. सघन प्रणाली - गहरी बिछाली प्रणाली,  बिछावन अहात प्रणाली , तार फर्श वाला घर प्रणाली, बेटरि प्रणाली।

कुक्कुट आवास मे काम आने वाले उपकरण 

  1. दाने के बर्तन 
  2. पानी के बर्तन
  3. अण्डे का घोसला या बॉक्स
  4. ग्रिट के बर्तन 

अण्डे का घोसला या बक्सा 

 मुर्गीयों के अण्डो को रखने व देने के लिए  इन का उपयोग करते है जिसमे अण्डो को रखा जाता है 5-6 मुर्गीयों पर एक घोसले की सख्या होती है । 50 मुर्गीयों के लिए 5 फुट लम्बा, 2 फुट चौडा और 2 फिट ऊँचा सामुदायिक घोसला भी बनवाया जा सकता है। 

मुर्गीयों के आवास की व्वस्था करते वक्त ध्यान देने वाली बातें (मुर्गी पालन के लिए भूमि का चुनाव) 

  1. मुर्गीयों का आवास आबादी से दूर ना हो। 
  2. सुरक्षित हो 
  3. प्रकाश और हवा अच्छी आती हो। 
  4. आवास को साफ और सुखा रखना चाहिए। 
  5. आवास मे आहार व पानी की अच्छी व्वस्था हो 
  6. आवास रोगाणु मुक्त हो। 
  7. आवास मे अण्डो, मुर्गीयों, मुर्गो, चूजों की देख भाल के साधन उपलब्ध हो। 
  8. स्थान ऊँचा हो
  9. बिजली चिकित्सा की व्वस्था हो
  10. जमीन महंगी ना हो 

मुर्गी पालन के लिए आहार प्रब्धन (आहार व्यवस्था) 

मुर्गीयों के संतुलित भोजन (आहार) मे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, खनिज, विटामिन होने चाहिए। 


1. अण्डे देने वाली मुर्गीयों का आहार - 

20 माह से अधिक आयु की मुर्गीया जो अण्डो के लिए पाली जाती है उन को लेअर्स राशन दिया जाता है। 

  1. चावल पालिस 
  2. मुगफली की खली
  3. पीली मक्का
  4. ज्वार
  5. गेहूँ की चापड
  6. मछली का चूर्ण
  7. लाइम स्टोन
  8. हड्डी का चूर्ण
  9. प्रिमिक्स
  10. शीस या लपटी
  11. नमक

8 -20 सप्ताह के पक्षियों के लिए

ये आहार बढ़ने के लिए दिया जाता है इसे ग्रोअस आहार कहते है। 
  1. चावल पालिस 
  2. मुगफली की खली
  3. पीली मक्का
  4. ज्वार
  5. गेहूँ की चापड
  6. मछली का चूर्ण
  7. लाइम स्टोन
  8. हड्डी का चूर्ण
  9. प्रिमिक्स
  10. शीस या लपटी
  11. नमक
इन अभी की मात्रा निर्धारित है 
मुर्गी पालन poultry farming



मुर्गीयों को देने वाला हरा चारा:-

मुर्गीयों को सामान्य 4 सप्ताह के बाद विटामिन A तथा रेशे की पूर्ति के लिए हरा चारा दिया जाता है। इसे लिए 100 पक्षियों  मे 3 किलोग्राम हरा चारा देना चाहिए जैसे :- रिजका, बरसिम, पालक, आदि को धोकर देना चाहिए। 

मुर्गीयों को ग्रिटे खिलाना 

मुर्गीयों को ग्रिटे खिलाने से उन मे पाचन शक्ति बढ़ती है। इस लिए मुर्गीयों को ग्रिट खिलाई जाती है इसकी मात्रा निर्धारित है। 

मुर्गीयों का चारा व्वस्था करते वक्त ध्यान देने वाली बातें :-

  1. आहार मे उन दानों को सामिल करे जो आसानी से मिल सके 
  2. आहार संतुलित हो जिससे मुर्गीयों को सारे पोषक तत्वों की पूर्ति हो
  3. आहार मे सस्ते दानें ले
  4. सामग्री को पीस कर दे। 
  5. मुर्गीयों की सख्या के अनुसार दाने की मात्रा हो। 
  6. खाद्य सामग्री को मिला कर देना चाहिए। 
  7. मुर्गीयों की सख्या अधिक होने पर दलिया को गिला करके देना चाहिए। 
  8. आहार को रोगाणु मुक्त करे
  9. अधिक समय तक आहार को बनाकर न रखे। 
  10. आहार के कमरो मे सिलन, जानवर आदि ना आसके
  11. खाद्य सामग्री की समय - समय पर जाँच करते रहे। 

murgi palan loan

  1. देश में केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा मुर्गी पालन हेतु ऋण एवं अनुदान उपलब्ध करवाया जाता है। 
अपने नजदीकी  शहर गाँव मे इन योजना का पता कर सकते है कियो की अलग अलग स्थानों पर अलग अलग योजना होती है। 

मुर्गी प्रजनन केंद्रीय फार्म

मुंबई, 
भुवनेश्वर
हसन घाट मे अण्डे उत्पादन के लिए शकर नस्ले विकसित की गई है। 
मुर्गी पालन poultry farming


प्रजनन व्यवस्था

मुर्गी पालन को अगर बढाना है तो ये व्वस्था  अच्छे से अपनानी होगी कुछ लोग जिन को मुर्गी पालन की अधिक जानकारी नही होती है और वो अपना नुकसान करवा लेते है इस लिए आप जब भी मुर्गी पालन करे तो पूरी जानकारी के साथ शुरू करे। प्रजनन व्यवस्था करते वक्त निम्न बातो का ध्यान रखे। 
  • एक ही मुर्गी से अण्डो व बच्चो का उत्पादन नही करे। 
  • समय - समय पर नर व मादा को बदलते रहे। 
  • अच्छे नस्ले और स्वस्थ मुर्गी और मुर्गे का कोर्स करवा 
  • रोगी मुर्गी से बच्चे को ना प्राप्त करे आदि। 

मुर्गी पालन के लाभ

  1. हमारे देश मे अधिक लोग कुपोषण के शिकार है तथा अण्डो मे से प्रोटीन की मात्रा पूरी की जा शक्ति है और माँस से भी
  2. यह व्यवसास  अपेक्षाकृत कम पूँजी द्वारा प्रारभ किया जा सकता है। 
  3. व्यवसास शुरू करने के 2 माह के बाद ब्रायलर मुर्गीयों को बेचकर तथा 5 माह बाद अण्डो को बेच कर आय प्राप्त कर सकते है। 
  4. व्यवसास शुरू करने के लिए थोड़ी तकनिक की जानकारी होनी आवसक है। 
  5. खाली समय का सदुपयोग
  6. मुर्गीयों की बींट से उत्म किस्म की खाद तयार करना 
  7. कुक्कुट फार्म पर नर मुर्गे नही रखने से अधिक लाभ होता है। 
  8. अण्डो को अधिक समय तक रख सकते है। 
  9. बेकार खाद्य पदार्थ खराब होने पर मुर्गीयों के लिए काम आना
  10. आय का अच्छा स्रोत। 
  11. रोजगार मिलना। 

मुर्गी पालन मे आने वाली समस्या

मुर्गी  मे जादा तर बीमारियों का अधिक खतरा होता इससे मुर्गी पालन मे रोग सबसे बड़ा खतरा है इस से की मुर्गिया मर जाती है और कई काम की नही रहती इस लिए रोगों से बचने और उपचार व रोग निम्न है। 

रोगों के नाम 

  1. रानी खेत :-  
ये मुर्गीयों की एक घातक बीमारी है जिसका असर मुर्गीयों मे शवशन व तन्त्रिका तन्त्र प्रभावित होता है पर इसे कम उम्र के चूजे प्रभावित होते है 
  • मुर्गियों का दिमाग (ब्रेन) प्रभावित होते ही शरीर का संतुलन लड़खड़ता है, गर्दन लुढ़कने लगती है।
  • छींके और खाँसी आना शुरु हो जाता है।
  • साँस के नली के प्रभावित होने से साँस लेने में तकलीफ, मुर्गियाँ मुँह खोलकर साँस लेती है।
  • कभी-कभी शरीर के किसी हिस्से को लकवा मार जाता है।
  •  मुर्गियों का आकाश की ओर देखना।
  • पाचन तंत्र प्रभावित होने पर डायरिया की स्थिति बनती है और मुर्गियाँ पतला और हरे रंग का मल करने लगती है डायरिया के चलते लीवर भी ख़राब हो जाता है।
  • इस रोग में गैस्पिंग खांसी , गले की खराश , रैटलिंग की आवाज मुख्य रूप से पाये जातें हैं ।
  • मुर्गियां दाना खाना कम कर देतीं हैं और मुर्गियों को प्यास काफी अधिक लगती है ।
  • पंख तथा पैर में लकवा लग जाता है ।

उपचार 

वर्तमान मे किसी भी मूल्य का कोई कारगर इलाज नहीं है। उचित आवास और समान्य देख भाल अच्छी तरह करे। 

रोकथाम

  • रोग से मरे हुए पक्षियों को गड्ढे में दबा देना या जला देना चाहिए
  • रोगी मुर्गीयों को कतल कर दे। 
  • रोगी मुर्गीयों को अलग कर दे। 
  • साफ सफाई का ध्यान रखे। 
  • टीकाकरण  करवाया। 
  • देख भाल के लिए एक व्यक्ति का होना। 
  • रोग उभरने के बाद यदि तुरंत ‘रानीखेत एफ-वन’ नामक वैक्सीन दी जाए तो 24 से 48 घंटे में पक्षी की हालत सुधरने लगती है।
  •  टीकाकरण स्वस्थ पक्षियों मे सुबह के समय करना चाहिए और उन्हें रोग से प्रभावित पक्षियों से अलग कर देना चाहिए।

चेचक रोग 

चेचक सभी उम्र के मुर्गीयों मे होता है किंतु 2 - 12 सप्ताह की आयु मे य रोग अधिक होता है। 

लक्षण:-

  1. इस रोग मे मुर्गीयों के कल्लंगी, चेहरे, पर सुखी प्पडी की तरह प्रकोप दिखाई देता है। से सुखा चेचक कहते हैं। 
  2. आंद्र चेचक इस मे मुख तथा गराश नली की म्युक्स झिल्ली प्रभावित होती है। 
  3. मुर्गीयों मे तेज बुखार होता है। 
  4. पूरे शरीर पर छोटे - छोटे फ्फोले पड़ जाते है। 
  5. सिर पर सूजन जिस से मुर्गी मर जाती है। 

 

उपचार:-  

इस बीमारी का कोई निश्चित उपचार नहीं है। वेरिओलिनम दौ सौ पांच ड्रॉप प्रतिदिन देने से बचाव भी होता है। 
  • प्पड़ियो को खुरच कर उतार देश चाहिए
  • घाव पर सिल्वर नाइट्रोजन का घोल लगाय
  • शरीर पर 10℅  कर्बोलटिक वसेलिने को लगा ये। 
  • पीजीयन पॉक्स वेस्लीन लगाई ये
  • फाउल  पॉक्स वेस्लीन लगाई ये

मुर्गीयों को विभिन्न रोगों से बचाने के लिए सवधानी
  • दर्बो की नियमित सफाई हो तथा आस पास भी सफाई होनी चाहिए। 
  • रोगों से मेरे मुर्गीयों को गढौं मे दबा दे। 
  • मक्की,मछर, कॉकरोच , जू, चिचडी, व अन्य जीवो का नियन्त्रण करे। 
  • छोटे चूजों को दवा व वक्सिं लगवाय। 
  • सभी मुर्गीयों को आवास से हटा कर कुछ समय के लिए अलग स्थान पर रख दे  और आवास मे कीटनाशक और रोग नस्को का छिड काव कर दे। 
मुर्गी पालन के FAQ

1. मुर्गी पालन मे कितना खर्चा होता है।

Ans: 1000 से 1500 भी और 50000 से 1 लाख तक भी इस मे कोई सीमा नही है। 
 
2. मुर्गी पालन (poultry farming) से business कैसे कर सकते है। 
Ans: अण्डा, माँस, मुर्गीयों को बेच कर व मुर्गीयों की बींट की खाद बना कर। 

3. अण्डो मे पाय जाने वाले अवयव 

Ans : जल, प्रोटीन, वसा, खनिज लवण

4. मुर्गी कर माँस पाय जाने वाले अवयव

Ans: जल, प्रोटीन, वसा, खनिज लवण, कार्बोहाइड्रेट, 

5. मुर्गी पालन को क्या कहते है। 

Ans: poultry farming


मुर्गी पालन poultry farming शुरू करने से पहले पूरी जानकारी लेकर ही करे अन्यथा लाभ नही होगा और भी business करने के लिए बाकी post पढ़े। 


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