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afim ki kheti (अफीम की खेती )। अफीम की खेती का लाइसेंस | सरकार करने का दे रही है अफीम की खेती का मौका

 आप सभी भी अगर अफीम की खेती करने की सोच रहे है और आप को जादा जानकारी नही है तो आप को जरूर इस blog को जरूर बढ़ना होगा। आज के जमाने मे लोग अफीम को नशे के लिए उपयोग करते है इस लिए सरकार ने इसे ग्रकानूनी घोसित कर दिया है और उन ही किसानो को afeem ki kheti    आदेश है  जिन के पास लाइसेंस है। सरकार अफीम से दवाइयां बनाती है इस लिए कुछ ही क्षेत्र मे लाइसेंस जारी किया है। अफीम की खेती कर के आप अच्छा खासा पैसा कमा सकते है ये भी एक business हो सकता है जो सरकार के साथ किया जाता है 

afim ki kheti

 अफीम की खेती (afeem ki kheti) 


भारत मे यहाँ होती है अफीम की खेती

  1. राजस्थान मे, चितोर्गढ, कोटा, बारा, भीलवाड़ा, उदयपुर, प्रतापगढ़
  2. M.P मे, कई जिलों मे जैसे रतनाम, मंदोस और जावरा, निमच
  3. Up me अफीम की खेती होती है 

अफीम की खेती के लिए लाइसेंस

इसकी खेती के लिए भारत सरकार के वित मंत्रालय ministry of frience देती है जो समय - समय पर बदलते रहते है और कुछ नियम और शर्तो पर दिया जाता है। 

अफीम की किस्म

  1. जाहवार अफीम - 540
  2. जवाहर अफीम - 539
  3. जवाहर अफीम- 16 आदि 

अफीम की खेती का समय

अफीम को ठण्ड मे बोया जाता है जिसका समय होता है  October से November मे बाई जाती है उससे पहले खेत की जाँच होती है। 

अफीम की खेत की तेयारी

खेत को 4-5 दिन पहले खेत की मिटी की सरकार द्वारा जाँच करने के बाद खेत की जुताई कर देते है तीन से चार बार फिर इसमे पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए गोबर की खाद, कम्पोस्ट, उर्वरक संतुलित मात्रा डाल देते है और मिला देते है। खेत की जाँच इस लिए करते है की यह पता कर सके की खेत मे कौनसे पोषक तत्वों की कमी है खेत मे। 

अफीम की बीज कीमत

बीज बहोत ही सस्ते मिलता है  जिसका रेट है 150- 250 रुपए kg

अफीम मे फूल लगने का समय  

अफीम के खेत मे फुल आने का समय बुआई करने के बाद 95 से 120 दिन लगते है  जो बाद मे झड़ जाते है और फुल के स्थान पर डोडे लग जाते है ये डोडे 20 से 25 दिन मे लगते है 
अफीम की खेती



afeem kaise banta hai (harvesting कब करे)  

डोडे बनने के बाद दुपहर से लेकर शाम के 4 बजे तक डोडो मे चीरा लगाया जाता है जिनमे से अफीम का तरल पदार्थ निकलता है जो पूरी रात निकलता रहता है जिसे अगली सुबह दोपहर से पहले इक्कठा कर लेते है ये प्रक्रिया रोज की जाती है जब अफीम का तरल पदार्थ  निकलना बन्द हो जाता है तब खेत को सुखाने के लिए छोड़ दिया जाता है और खेत की फ़सल सुखाने के बाद इन से बीज निकाल लिया जाता है। 

अफीम की खेती


अफीम का उत्पादन प्रति हेक्टर

एक हेक्टर से 50 - 60 kg अफीम का पदार्थ इक्कठा होता है जो समय और मोसम के प्रभाव से घट या बड़ सकता है। 

सरकार को अफीम कब बचते का समय

अप्रैल माह मे अफीम बिकने लगता है जिसे सरकार खरीदती है 

afeem ka price per kg 

अगर सरकार खरीदती है तो 1800 से 2000 हजार रुपये किलो के हिसाब से और काला बाजार मे इसकी कीमत 60 हजार से 3 लाख तक है। 

सावधानी व कानूनी कार्रवाई

  1. अफीम की खेती आप जब कानून के नियमो के विरुध करते वक्त आप पकड़े जाते है तो आप से लाइसंस जपत कर लिया जाता है
  2. बिना लाइसेंस के खेती करने पर 2 से 5 साल की सजा और 2 लाख तक का जुर्माना। 
  3. अफीम को कानून से छिपके बचने पर NDPS ACT के तहत कारवाई होती है। 
  4. सरकार की तय की गई भूमि पर ही खेती करे 
  5. जितनी मात्रा का कहा है उतनी मात्रा ही बॉय
  6. हैर फेर ना करे
  7. अफीम के पौधों को लकड़ी से बांध दे जिससे वो हवा से नही झुके
  8. अफीम को इक्कठा करने से कुछ दिनों पहले सिंचाई कर दे 

अफीम की खेती से कमाई

सरकार को बेचने के बाद जो खेत मे पड़ी फ़सल है उस मे से खस- खस निकाल कर बचने से खस - खस एक लाख रुपए कुंटल बिकती है इसे आप को अच्छा खासा मुनाफा होता है। 
अफीम की खेती



सब्सिडी

जब कोई मोसमि समस्या के कारण अफीम की फ़सल नष्ट हो जाए तो सरकार पूरी जाँच और सभी खेत के अवसेसो के आधार पर तय करती है की कितना मुहावहजा देना है। 

अफीम के FAQ

Q. 1 अफीम का वज्ञानिक नाम

Ans: पैपेवर सोमनिफेरम

Q. 2 अफीम को और किस नाम से जानते है 

ANS: काला सोना black gold
Q. 3 अफीम का उपयोग कहा कहा होता है। 
ANA: दवाई बनाने मे, और कुछ मजदूर माता अपने बच्चो को सुलाने के लिए, नशे के लिए  आदि। 

दोस्तो आप अफीम की खेती को कानून की सहला लेकर ही करे अन्य था मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। 

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