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सब्जियों की खेती, vegetables farming in india, कुछ समानय सी जानकारी जो जरूरी है हर सब्जी उगाने वाले को

 परिचय :

आज के जमाने मे लोगो को अधिक से अधिक पैसा कमाना है परन्तु उन को यह नही पता की कैसे कमा ये तो आप को एक बार सब्जी की खेती करना चाहिए क्यो की सब्जी हर घर मे मिल जाती है चाहय घर माँसाहारी हो या शाखाहारी ही ये business आप को अमीर बना देगा। सब्जी की खेती करने के लिए आप को बस थोड़े से ज्ञान की जरूरत होगी और फिर आप भी कर पाय गे सब्जी उत्पादन और मंडी और बाजार मे भेज सकते है। ऋतुओ के आधार पर सब्जियों को तीन भागो मे वर्गीकारण मे बाँट है - रबी, खरीफ, जायद की फसलें है पूरी जानकारी के लिए  आगे पढ़े। 
सब्जी की खेती

सब्जी की खेती (vegetable farming) 


ऋतुओ के आधार पर 

रबी की सब्जी : इस को सितम्बर से अकटुम्बर मे बाई जाती है। जैसे:-फुलगोबि, मटर, प्याज, लहसुन, गाजर, मूली, पतागोभी, गाँठगोभी, आदि 

जायद की सब्जिया : इसको फरवरी से मार्च मे बाई जाती है जैसे;-  खरबुज, ककड़ी, टिंडा, करेला, खीरा, भिण्डि, तोराइ, लोक मुख्य है। 
खरीफ की सब्जी : जून से जुलाई मे बाई जाती है जैसे:- ग्वार, लोकी, भिण्डि, करेला, खीरा, टमाटर, तोराइ, बैंगन, आदि मुख्य हैं। 

सब्जी की खेती के प्रकार

  1. गुहवाटिका स्तर पर सब्जी बोना
  2. व्यवसाय स्तर पर सब्जी बोना, मार्केटिंग गार्डनिग, ट्रक गार्डनिग, आती है। 
  3. बीज उत्पादन के लिए सब्जी उगाना
  4. ससाधन के लिए सब्जियों को उगाना
  5. बे - मौसमी सब्जी
  6. तेरते हुई सब्जी
  7. प्रदशन के ली सब्जी को उगाना। 

इन सभी का अलग अलग उद्शय होता है किसी को सिर्फ बीज चाहिए तो किसी को घर के लिए और किसी को धन के लिए हम इस मे धन के लिए बता रहे है इस लिए व्यवसास स्तर पर बोई जाने और बाकी कार्य की बात करगे

 1.व्यवसास खेती

इस मे खेती का मुख्य उदस्य धन के लिए किया जाता है जिससे मंडी आदि स्थानों पर बेच कर प्राप्त करते है। 

2. मार्केट गार्डनिग:  बाजार मे बचने के लिए बाई जाती है। 

3. ट्रक गाडर्निग: दूर - दूर सब्जी को भेजने के लिए। उपयोग मे ली जाती है। 

अब बात करते है की सब्जी को उगाने के लिए क्या- क्या करना होता है। 

स्थान का चुनाव


स्थान का चुनाव सब्जी उगाने के लिए प्रथम प्डाव होता है अगर स्थान हमारी सब्जियों के अनुकूल नही होगा तो सब्जी का उत्पादन मे हानि हो शक्ति है इस लिए स्थान का चुनाव करते वक्त इन बातो का ध्यान रखे। 
  • पौधशाला की स्थिति 
  • मिटी उप जाऊ हो और कनकर पथर नही हो
  • सिंचाई की सुविधा हो। 
  • प्रदूषित स्थान रहित हो
  • प्रशिक्षण बागवानी को उपलब्द हो
  • धूप व हवा उपयुक्त मात्रा मे आना
  • सुरशित स्थान 
  • छाया दार स्थान हो
  • खाद की सुविधा हो 
  • जल निकाश का उचित प्रब्धन हो। 

पौधशाला या खेत की तेयारी करना।

  • जिस स्थान पर सब्जी बाई है उस स्थान के चारो और बाड या जाली से गहरा बन्दी करे जिससे मवसियो से सुरक्षित रखा जा सकता है । 
  • खेती मे काम आने वाले यंत्रों को सही से उपयोग करना सीखना और रख रखाव का ध्यान रखना
  • सिंचाई की उपयोगी व्वस्था 
  • भूमि मे खाद, उर्वरक, निराइ गड़ाई आदि करके भूमि को उपजाऊ बनाय
  • कोनसी सब्जी बोनि है उस सब्जियों का चुनाव कर ले 
  • खेत मे जैविक खाद डाले जिससे सब्जिया अच्छी व स्वस्थ उत्पन्न होगी। 

एक सब्जी की पौध शाला मे यह खण्ड होने चाईय

  • कार्यालय एवं आवास खण्ड
  • खाद भंडारण शेत्र
  • बीज पात्र
  • स्थाई सिंचाई खण्ड 
  • बीज बोने की कियारी 
  • विशेष इकाई शेत्रशेत्र

बिजो की बुआई

  • छिटक कर
  • चोबकर
  • लाइन या पक्तियो मे बुआई करना 

पौध तयार करके बुआई

इस मे पौधों को अच्छे से पहले नर्सरी मे पौध तयार किया जाता है और फिर बोया जाता है जैसे : टामाटर, बैगन, मिर्च, प्याज, गोभी वर्गीय सब्जियों की पौध तयार करके ही बाई जाती है 
इन सब की जानकारी व तयारी के बाद सब्जी को बोने के लिए भूमि को तेयार करना होगा 

भूमि को तेयार करना

सब्जी को बोने के लिए भूमि मे खाद को डाल कर निराइ गुडाइ करते है अब हल्की सिंचाई कर देते है और पौधों या बिजो की बुआई कर देते है। 

पौधों को बोना

  • पौधों को मुख्य खेत मे रोपाई का कार्य उनकी किस्मे के अनुसार उचित समय मे बाई जाती है। 
  • स्वस्थ पौधों को ही खेत मे लगाना चाहिए
  • शाखा मे तीन चार पति आने पर पृतिरोपन कर देते है
  • पौधों की दूरी आपस मे कम या जादा नही होना चाहिए 
  • पौधों के रोपाई  के तुरन्त बाद सिंचाई कर दे 
  • कमजोर या मरे पौधों के स्थान पर नई पौधों का प्रतिरोपन करना जरूरी है। 

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