सिंचाई ,(Irrigation) irrigation in hindi,सिंचाई किसे कहते हैं
कूर्षी उत्पादन की दुष्टि से समुचित सिंचाई व्यवस्था अत्यन्त महत्वपूर्ण है। वर्तमान मे कृषि आदान मे सिंचाई सबसे महत्वपूर्ण है। आप सभी भली भाती परिचित है की पुरी पृथ्वी का जीवन खेती पर टिका है और खेती का business करने के लिए पानी की जरूरत होती है और अपने व्यापार मे लाभ के लिए अधिक से अधिक फ़सल उत्पादन करना होता है जिसमे सिंचाई का most roll होता है।
irrigation in hindi,सिंचाई
सिंचाई किसे कहते है परिभाषा -
सिंचाई मिट्टी को कृत्रिम रूप से पानी देकर उसमे उपलब्ध जल की मात्रा में वृद्धि करने की क्रिया है और आमतौर पर इसका प्रयोग फसल उगाने के दौरान, शुष्क क्षेत्रों या पर्याप्त वर्षा ना होने की स्थिति में पौधों की जल आवश्यकता पूरी करने के लिए किया जाता है।
सिंचाई के उद्देश्य -
- फसल को पाले से बचाने के लिए
- मिट्टी को सूखकर कठोर (समेकन) बनने से रोकने के लिए
- धान के खेतों में खरपतवार की वृद्धि पर लगाम लगाने,
- मिटी मे नमी बनाय रखने के लिए
- पौधों और फसलों की वृद्धि के लिए
- पोषक तत्व को घुलनशील बनाने के लिए
- पौधों को गर्मी से बचाने के लिए आदि उद्देश्य के लिए की जाती है।
फसलों मे सिंचाई कब करे -
विभिन्न फसलों मे अलग - अलग जल मांग होती है और आवसकता होने पर सिंचाई करना जरूरी होता है कुछ पौधों मे बुआई से बाद 20- 30 दिन मे सिंचाई करते है रहते है नीचे दी गई फोटो मे आप देख सकते है की निम्न फसलों मे कब कब सिंचाई करनी चाहिए -
पौधों के लक्षणों के आधार पर
- पौधे मुरझाय हुए दिखाई देना
- पौधों की वृद्धि रुक जाना
- पौधे पीले पड़ जाना
- पौधे बोने रह जाना
- फुल व फल कम लगना आदि लक्षणों के आधार पर भी कर सकते है।
पर कभी कभी ये लक्षण पोषक तत्व की कमी के कारण भी दिखाई देते है।
फसलों की जल माँग
धान की - 900-2500m.m
गेहूँ की - 450- 650m.m
गन्ना की - 1500- 2500m.m
आलू - 500-700m.m
मूंगफली - 500-700m.m
कपास - 700- 1300m.m
सोयाबीन - 450 - 700m.m
मक्का - 500 - 800m.m होती है
सिंचाई की विधियाँ
- चौकेबार द्रोणी सिंचाई विधि
- बॉर्डर पट्टी सिंचाई विधि
- कुंड सिंचाई विधि
- बूंद- बूंद सिंचाई विधि
- बौछारी सिंचाई विधि
- अधोभूमि विधि
सिंचाई के लाभ
- अपर्याप्त वर्षा से पानी की आवश्यकता को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। अपर्याप्त वर्षा से होने वाली कमी को सिंचाई के माध्यम से दूर करने का प्रयास किया जाता है। सूखे के वर्षों में, सिंचाई इसलिए मदद करती है।
- फसल की पैदावार में वृद्धि होती है, और सिंचाई से स्थानीय आजीविका में वृद्धि होती है। इस प्रकार, लोगों के जीवन की गुणवत्ता बढ़ जाती है।
- इसके अतिरिक्त, सिंचाई से देश के धन में दो तरह से वृद्धि होती है। सिंचाई सबसे पहले प्रचुर मात्रा में फसल पैदा करके देश को खाद्य जरूरतों में आत्मनिर्भर बनाती है। दूसरा, राजस्व बढ़ता है क्योंकि उत्पादकों को प्रदान किए जाने पर सिंचाई पर कर लगता है
- सिंचाई के साथ, किसान नकदी फसलें लगा सकते हैं जो नियमित फसलों की तुलना में अधिक रिटर्न देती हैं जो वे सिंचाई के बिना पैदा कर सकते थे। नकदी फसलों में आलू, तंबाकू, गन्ना और फलों के बगीचे शामिल हैं।
- संचार के लिए कभी-कभी बड़े सिंचाई चैनलों का उपयोग किया जा सकता है।
- सिंचाई चैनलों को पार करने वाले झरनों का उपयोग करके एक पनबिजली संयंत्र बनाया जा सकता है।
- घरेलू लाभों पर विचार करना आवश्यक है। बेहतर ताजे पानी के संचलन और उस तक आसान पहुंच सिंचाई के दो लाभ हैं।
- फसलो की वृद्धि अच्छी होने पर फुनाफा अधिक होता है।
- खेत मे सही मात्रा मे पानी देने से पौधों मे कीट का प्रकोप कम
- पाले व सूखे से बचाव
- कम पानी मे अधिक सिंचाई
- कम समय मे अधिक सिंचाई
सिंचाई की हानि
- अधिक सिंचाई करने से मिट्टी में वायु संचार में कमी आ जाती है, जिससे पौधे की वृद्धि रुक जाती है। यदि खेत की भूमि मटियार मिट्टी ज्यादा हो तो ऐसी अवस्था में सिंचाई द्वारा अथवा अधिक वर्षा आवश्यकता से अधिक जल प्राप्त होने पर निचली तहों में प्रवाह अवरूद्ध हो जाता है और जल एकत्र हो जाता है।
- एक सिंचाई समस्या जिससे बचना लगातार कठिन होता जा रहा है, वह है सिंचाई के पानी में लवण की उपस्थिति, या लवणता। सिंचाई जल लवणता एक समस्या है क्योंकि मिट्टी के घोल में नमक की सघनता और मिट्टी में पौधों की वृद्धि दर के बीच नकारात्मक संबंध है।
- सिंचाई कभी-कभी पूरे मार्ग में अनियंत्रित उत्सर्जन और पानी के रिसाव का कारण बनती है।
- बहता हुआ सिंचित जल कीटों को अपना आवास बनाने के लिए स्थान प्रदान करता है जो विभिन्न रोगों को जन्म देने वाले परिवेश के लिए हानिकारक है।
- चूंकि सिंचित पानी उलटाव को कम करने में मदद करता है, कभी-कभी यह क्षेत्र को गीली और पसीने वाली सतह में बदल देता है। अत्यधिक सिंचाई पानी को बढ़ाकर विशिष्ट क्षेत्र को रोक देती है।
- विशाल सिंचाई जलमार्गों का निर्माण करते समय लोग अपनी आवासीय और व्यावसायिक भूमि खो देते हैं।
- हर बार सिंचाई करना मुनासिब नहीं होता। सिंचाई का भ्रूणीय मूल्य काफी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, और अंतत: लोगों को बहुत सारे थोपे गए करों का भुगतान करना पड़ता है।
- बरसात के मौसम में सिंचाई मुक्तहत्या के मार्ग में बाधक बन जाती है।
- लापरवाही और अधिक सिंचाई से नमक का फूलना हो सकता है ।
यह थी सिंचाई से जुड़ी कुछ बातें जिस के द्वारा आप अपने खेती के व्यापार को बढ़ा सकते है और भी business व्यापार से जुड़ी जान करी के लिए जुड़े रहे हमसे


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